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Showing posts from November, 2025

शैतान बंदर

 एक जगल के पास कुछ लोग काम में जुटे हुए थे उन्हें एक मंदिर ओर धर्मशाला बनाने का काम सौंपा गया था एक दिन दोपहर में धूप बहुत तेज थी गर्मी में लोगों के लिए काम करना मुश्किल हो रहा था। एक बढ़ई बोला मुझसे तो अब गर्मी बर्दाश्त नहीं हो रही हैं इसलिए मैं भोजन करने के लिए गांव जा रहा हूं भोजन करने के बाद मैं थोड़ी देर आराम करूंगा। तुम लोग मेरे साथ चलना चाहो तो आ जाओ।  काम करते हुए तो सभी बढ़ई थक चुके थे इसलिए उन सभी ने अपने साथी की बात मान ली। एक बढ़ई ने कहा भूख तो मुझे भी बहुत लगी है लेकिन दो मिनट जरा रुको। इस लकड़े को चीरने में मुझे बहुत समय लगा है मुझे इसकी कटी हुई जगह में एक लकड़ी फसा लेने दो जिससे यह दोबारा बंद न हो।  यह कहते हुए उस बढ़ई ने लकड़े के चिरे हुए सिरों के बीच पर लकड़ी का एक छोटा टुकड़ा फसा दिया। फिर सभी बढ़ई भोजन करने के लिए गांव चले गए। थोड़ी ही देर में बंदरों का एक झुंड उसी जगह पर आ पहुंचा जहां बढ़ई अपने औजार आदि छोड़ गए थे वहां पहुंचते ही बंदरों ने खुराफात शुरू कर दी। कोई बंदर वहां रखे लकड़ी पर उछलते लगा तो कुछ लकड़ियों के छोटे छोटे टुकड़े उठाकर खेलने लगे। ...

शेर और सियार

 एक घने जगल में एक लंबी गुफा में शेर दंपति रहती थे एक दिन शेरनी ने दो शावकों को जन्म दिया वे शावक पूरा दिन गुफा में इधर उधर घूमते रहते थे उन शावकों को खेलते देखकर शेरनी बहुत खुश हुआ करती। उन शावक को कुछ खाने को नहीं मिलता था थोड़ा सा खाने को मिलता था उनका पेट पूरा भर नहीं सकता। वे जितना खाते उतनी ही उन्हें ओर भूख लगती एक दिन शेर भोजन की तलाश में सुबह ही गुफा से निकल गया दोपहर में जब वह वापिस लौटा तो खाली हाथ था जब शेरनी ने उससे भोजन के विषय में पूछा तो शेर बोला आज तो कोई शिकार मिला ही नहीं। शेर की बात सुनकर शेरनी बोली हमारे बच्चे बहुत भूखे हैं तुम किसी भी तरह उनके लिए भोजन लेकर आओ। शेरनी की बात सुनकर शेर फिर भोजन लाने के लिए चल पड़ा। इस बार गुफा से थोड़ी ही दूर जाने पर उसे दो खरगोस मिले। शेर ने उन्हें मार डाला और वापिस लौट पड़ा थोड़ी ही दूर पर उसे एक शिशु सियार मिल गया। शेर ने उसे जीवित ही अपने पंजी में दबाया और गुफा की ओर चल पड़ा गुफा में पहुंचकर वह अपने शेरनी से बोला ये तो खरगोश बच्चों को खिला दो ओर इस सियार को हम लोग बांटकर खा लेना है उस शिशु सियार को देखकर शेरनी को बहुत दया आई।...

खटमल और मच्छर

 एक रात एक राजा अपने बिस्तर पर सो रहा था उसकी सेज में एक खटमल ने अपना घर बना लिया था रोज रात जब राजा अपने सपनो में खो जाता तो खटमल अपनी छिपने की जगह से बाहर निकल आता ओर राजा का खून चूसता। राजा का खून उसे बहुत ही स्वादिष्ट लगता था कुछ ही दिनों में वह खूब मोटा हो गया।  एक दिन जब राजा के कमरे की खिड़की खुली हुई थी तभी एक मच्छर कमरे में घुस आया। जब खटमल ने उसके भिनभिनाने की आवाज सुनी तो घुसपैठिए को देखने के लिए वह अपनी छिपने की जगह से बाहर निकल आया मच्छर पर नजर पड़ते ही वह उस पर गुस्सा होते हुए बोला तुम कौन हो और यहां बिना अनुमति के कैसे घुस आए क्या तुम्हे नहीं पता कि यह राजा का कमरा है और कोई भी यहां बिना अनुमति के प्रवेश नहीं कर सकता।  मुझे कही जाने के लिए अनुमति की आवश्यकता नहीं है अगर मैं कही जाने के लिए अनुमति का इंतजार करूं तो कही पर भी घुस नहीं पाऊंगा। अब तुम्हारे पहले सवाल का जवाब हे कि मुझे मच्छर कहते है और में कमरे की खुली हुई खिड़की से यहां घुसा हु अगर राजा मुझे कभी देखता तो यही गाना गाता मेरे सामने वाली खिड़की में एक बड़ा सा मच्छर रहता था अंदर नहीं आता है वो कुछ उ...

झील का राक्षस

 किसी जगल में एक विशाल झील थी एक विकराल राक्षस ने उस झील को अपना घर बना लिया था उसने सारे जानवरों को उस झील में घुसने से रोक दिया था उसी जगल में बंदरों का एक विशाल समूह भी रहता था एक दिन बंदरों के सरदार ने सारे बंदरों को बुलाकर कहा मैने तुम्हे यह बताने के लिए बुलाया है कि झील के राक्षस ने किसी भी जानवर को उस झील में घुसने से मना किया है अगर किसी ने इसके बाद भी झील में घुसने की कोशिश की तो वह राक्षस उसे मार दिया जाएगा।  बंदरों ने झील में जाना बंद कर दिया और नदी के पानी से ही काम चलाने लगे। कई सालों तक वे उस झील के करीब भी नहीं फटके। एक साल उस जगल में भयंकर अकाल पड़ा। नदी सुख गई और भोजन की भी भारी कमी हो गई। सभी जानवर उस स्थान से भागने लगे। लेकिन बंदरों को उस जगल से बहुत प्रेम था उन्होंने तय कर लिया था कि वे किसी भी स्थिति में जगल छोड़कर नहीं जाएंगे।  बंदरों ने एक बार फिर बैठक बुलाई एक बंदर ने कहा अगर हमें जल्दी पानी की समस्या का कोई समाधान न मिला तो हम सब मर जाएंगे कम भोजन करके तो जीवित रहा जा सकता है लेकिन पानी के बिना तो जीवित रहना असंभव है।  हमें झील से पानी मिल सक...

दिन के सपने

 एक गांव में एक ब्राह्मण रहता था वह भिक्षा मांगकर अपना जीवन यापन करता था एक बार जब वह भिक्षा मांगकर अपने घर वापिस लौट रहा था तभी उसे सड़क के किनारे रखा एक घड़ा दिखाई दिया उड़ने घड़े को खोलकर देखा तो पाया कि उसमें आटा भरा हुआ था वह उस घड़े को खुशी खुशी घर ले आया। उसने उस घड़े को अपने बिस्तर के पास ही लटका दिया और खुद बिस्तर पर लेटकर आराम करने लगा। वह सोच रहा था कल मैं इस घड़े को बाजार ले जाकर सारा आटा बेच दूंगा। जितना पैसा मुझे मिलेगा वह एक बकरी खरीदने के लिए काफी होगा। वह बकरी मुझे दूध देगी। इस तरह मुझे घर बैठे दूध पीने को मिलेगा कुछ दिनों बाद वह बकरी अपने बच्चों को जन्म देगी। वे बच्चे भी बड़े हो जाएंगे वे भी तब दूध देगे मैं उस दूध को बेचकर पैसे कमाऊंगा। इस तरह मेरे पास पैसे की कोई कमी नहीं रहेगी। जल्द ही मेरे पास बकरियों की अच्छी खासी भीड़ हो जाएगी। फिर मैं उन बकरियों को भी बाजार में बेच दूंगा। उस धन से मैं गाये खरीदूंगा। मेरे पास जितनी गाये होगी उतनी पूरे गांव में किसी के पास नहीं होगी। बकरियों की तरह वे भी मुझे दूध देगी मैं गायों का दूध बाजार में बेचकर खूब पैसे कमाऊंगा। उन गायों...

गधा बन गया बाघ

एक गांव में एक धोबी रहता था उसके पास एक गधा था जो धोबी के लिए गंदे और धुले हुए कपड़ों को इधर उधर कपड़े को पहुंचा देते थे धोबी की कमाई ज्यादा नहीं थी और वह गधे को जो खाना खिलाता था वह उसके लिए नाकाफी था बेचारा गधा दिन प्रतिदिन कमजोर होता जा रहा था एक दिन धोबी किसी काम से पास के एक गांव में जा रहा था उस गांव के रास्ते में एक जगल भी था उस जगल से गुजरते समय उसकी नजर एक मरे हुए बाघ पर पड़ी तभी उसके दिमाग में एक योजना आई उसने अपना चाकू निकालकर जल्दी जल्दी उस बाघ की खाल उतारी और अपने गांव लौट आया वह अपने गधे को वह खाल दिखाता हुआ बोला तुम मेरे लिए दिन रात काम करते हो लेकिन मैं तुम्हे भरपेट खाना खाना भी नहीं दे पाता हूं अब मैं तुम्हे रात में यह बाघ की खाल पहना दिया करूंगा इसे पहनकर तुम आराम से गांव वालो के खेतों में घूमना और पेट भरना। हर कोई तुम्हे बाघ ही समझेगा और तुम्हारे पास फटकने की हिम्मत नहीं करेगा। अपने मालिक धोबी की बात सुनकर गधा बहुत खुश हुआ वह सोच रहा था कि अब उसे भूखे पेट नहीं सोना पड़ेगा। उसी रात धोबी ने उसे बाघ की खाल पहना दी और घर से बाहर भेज दिया। बाघ बना गधा टहलता हुआ एक किसान क...

चुहिया बनी दुल्हन

 बहुत समय पहले गंगा नदी के तट पर एक साधु रहते थे एक सुबह जब नदी के किनारे ध्यान लगाए बैठे हुए थे तभी एक बाज उड़ता हुआ वहां आया। वह बाज साधु के सिर के ऊपर से निकल रहा था कि तभी उसकी पकड़ ढीली हो गई और उसके पंजों में कैद चुहिया साधु की गोद में जा गिरी। साधु को चुहिया पर बड़ी दया आई न जाने उनके मन में क्या आया कि उन्होंने उस चुहिया को उठाकर एक मंत्र पढ़ना शुरू कर दिया चुहिया अगले ही पल एक बच्ची में बदल गई साधु उस बच्ची को अपनी पत्नी के पास ले जाकर बोले प्रिय हमारे कोई संतान नहीं है मैं जानता हूं कि तुम्हारे मन में संतानसुख प्राप्त करने की तीव्र इच्छा है इस बच्ची को अपना लो आज से यही हमारी संतान है साधु की पत्नी उस बच्ची को पाकर बड़ी खुश हुई उसने उस बच्ची को अपनी गोद में ले लिया और चूमने लगी। वह बड़े प्रेम से उस बच्ची का पालन पोषण करने लगी।  कई साल ऐसे ही गुजर गए वह छोटी बच्ची अब सुंदर लड़की बन गई थी साधु और उनकी पत्नी अपनी पुत्री के लिए वर खोज के करने लगे। साधु अपनी प्यारी पुत्री का हाथ किसी साधारण व्यक्ति के हाथ में नहीं देना चाहते थे इसलिए उन्होंने पूजा करके सूर्यदेव का आहवान क...

चतुर मेमना

 एक समय की बात है एक घना वन था उसमें बहुत से पशु पक्षी रहते थे वहीं पर एक भेड़ भी रहती थीं उसके तीन बच्चे थे भेड़ जहां भी जाती बच्चे भी उसके साथ जाते। एक दिन भेड़ ने अपने बच्चों से कहा बच्चों एक में जगल में अकेली जा रही हु। वहां से मैं ताजी ताजी मुलायम घास लाऊंगी। तुम सब घर पर ही रजने बाहर मत जाना। दूसरा दुष्ट भेड़िया तुम्हे खा जाएगा भेड़ का सबसे छोटा बच्चा बहुत शरारती था वह छिपकर अपनी मां के पीछे पीछे चला गया पास में ही एक झील पड़ती थी झील किनारे हरि हरि झाड़ियां थी वह वहां हरि हरि कोमल पत्तियां खाने लग गया भेड़ आगे चली गई। वहीं झील के किनारे एक भेड़िया पानी पी रहा था उसने मेमने को देखा उसने सोचा आज मैं इसे जरूर खाऊंगा। वह धीरे धीरे भेड़ के बच्चे के पास गया उससे बोला कहो बेटे क्या कर रहे हो भेड़िया की आवाज सुनकर मेमने ने ऊपर देखा भेड़िये को देखकर वह बहुत डर गया डर के कारण वह कुछ नहीं बोल पाया। भेड़िया ने फिर कहा हरि हरि घास खा रहे हो खाओ खूब खाओ मै भी आज बहुत भूखा हु मैं तो आज तुम्हे खाऊंगा मेमना डरते डरते बोला मामा अभी तो मैं बहुत छोटा हु भेड़िया ने कहा मुझे छोटे बच्चे अच्छे लगते...

अच्छी सलाह

 एक नदी के तट पर हंसो का समूह रहता था पूरा दिन वे नदी में हँसी ठिठोली करते घूमते रहते थे उन्होंने अपने घोंसले तट पर ही स्थित एक ऊंचे व मजबूत बरगद के पेड़ पर बना हुआ था एक दिन समूह के सबसे बूढ़े हंस ने सारे हंसो को बुलाकर कहा मैने पेड़ की जड़ के पास ही एक बेल को उगते हुए देखा है उस बेल को तुरंत उखाड़ फेंकने की जरूरत है नहीं तो वह बेल पेड़ के तने का सहारा लेकर ऊपर तक आ जाएगी किसी शिकारी या सांप के लिए उस बेल का सहारा लेकर ऊपर तक आना बहुत आसान हो जाएगा हम सबकी सुरक्षा इसी में हैं कि उस बेल को तुरंत उखाड़ फेंकना चाहिए मैं काफी बूढ़ा हो गया हु और अकेले उस बेल को उखाड़ने की अब मुझमें हिम्मत नहीं है तुम लोग उस बेल को उखाड़ फेंक दो। एक हंस बोला मेरे विचार से हमे उस छोटी सी बेल से घबराने की कोई जरूरत नहीं हे मुझे तो यही समझ में नहीं आता कि हमारे इतने बड़े झुंड को एक छोटी सी बेल से क्या खतरा पहुंच सकता है दूसरे हंस ने कहा तुम सही कहते हो व्यर्थ ताकत खर्च करने का कोई फायदा नहीं है जो बेल अभी छोटी तो हे उससे भला क्यों डरते हैं अगर खतरा होगा तो उससे निपट लिया जाएगा उन हंसो ने बूढ़े हंस की सलाह ...

साहसी ब्राह्मण

 बहुत समय पहले एक छोटे से गांव में रहता था अपनी आजीविका चलाने के लिए वह लोगों के घरों में पूजा पाठ करवाता था एक दिन उसने गांव के सबसे धनी व्यक्ति के घर में पूजा करवाई दक्षिणा के रूप में उसने ब्राह्मण को दो अच्छी नस्ल के दो स्वस्थ बछड़े दिए उन बछड़ों को पाकर ब्राह्मण बहुत खुश हुआ उन बछड़ों को वह घर ले गया और उन्हें छांव में बांध दिया वह उन बछड़ों को बड़े प्यार से देखभाल करने लगा  एक बार ब्राह्मण के घर के पास से एक चोर गुजरा वहां दो स्वस्थ बछड़ों का बंधे देखकर वह सोचने लगा ये बछड़े तो बड़ी अच्छी नस्ल के लग रहे है में इन्हें हर हाल में चुरा लूंगा इन बछड़ों के बड़े होने पर मेरी गरीबी दूर हो जाएगी इन बछड़ों की दक्षिणा दरअसल इस ब्राह्मण को नहीं बल्कि मुझे मिली है धीरे धीरे ब्राह्मण के घर के अंदर घुसा वह जानता था कि अगर ब्राह्मण की नींद खुल गई तो वह उसकी जमकर पिटाई करेगा उसने बछड़ों की छांव में कदम रखा ही था कि धुएं की लकीर सी उठी देखते ही देखते वह लकीर एक बदसूरत और भयानक राक्षस में बदल गई उस राक्षस को देखकर चोर बहुत घबराया चोर आया तो बछड़े को चुराने लेकिन अब तो उसे लेने के देने पड़ ...

सियार की हिम्मत

 जगल में एक बूढ़ा सियार रहता था वह भोजन की तलाश में इधर उधर घूम रहा था उसने कई दिनों से कुछ खाया नहीं था और उसको तेज भूख लगी थी वह मन ही मन में सोच रहा था कि अगर मुझे जल्दी कुछ खाने को नहीं मिला तो मैं मर जाऊंगा अचानक जोर जोर से आवाज सुनकर वह बुरी तरह घबरा गया और भागने लगा लेकिन कुछ ही दूर आगे बढ़ने पर उसके दिमाग में आया कि मुझे इस तरह नहीं घबराना चाहिए जिस जगह से वह आवाज आ रही थी वहां जाकर देखता हु कि यहां पर क्या है शायद वहां पर कुछ खाने को मिल जाता है तो मज़ा आ जाएगा वैसे भी मुझे बहुत भूख लग रही है और अगर खाने को नहीं मिला तो मैं बच नही सकता  यह सोचकर सियार उस ध्वनि की दिशा में जाने लगा जैसे जैसे वह करीब पहुंच रहा था वह आवाज तेज होती जा रही थी लेकिन सियार भी हिम्मत कर उसकी ओर बढ़ता गया थोड़ी ही देर में वह उस स्थान पर जा पहुंचा वह दरअसल एक मैदान था सियार ने एक पेड़ के पीछे छिपकर उस ओर देखा तो उस मैदान को पूरी तरह खाली पाकर हैरान रह गया वह सोचने लगा यहां तो कोई भी नहीं हे फिर यह आवाज कहा से आ रही थी  सियार उस मैदान में जा पहुंचा और ध्यान से उसका निरीक्षण करने लगा उस मैदा...

बदमाश बिल्ली

 एक गांव में एक पीपल का पेड़ था उस उसे पेड़ के एक खोखले तने मैं एक तीतर रहता था एक दिन जब वह भोजन की तलाश में इधर-उधर भटक रहा था तभी उसने जगल के एक हिस्से में कुछ बीजों को बिखरे हुए देखा चूंकि वहां भोजन की कोई कमी नहीं थी इसलिए तीतर ने फैसला किया कि जब तक वह सब बीजों को खा नहीं लेता तब तक वह वही रहेगा कई दिनों बाद जब तीतर अपने घर वापस लौटा  उसने देखा कि उस तने को एक खरगोश ने अपना घर बना लिया है यह देखकर उसे आश्चर्य भी हुआ ओर गुस्सा भी आया वह खरगोश से बोला तुम यहां क्या कर रहे हो यह मेरा घर है और तुम्हे यहां रहने का कोई अधिकार नहीं है इस पर खरगोश ने उत्तर दिया जब मैं यहां आया था तो यहां कोई नहीं था इसे खाली देख कर मैंने इसे ही अपना घर बना लिया अब यही मेरा घर है तुम्हारा इस पर कोई अधिकार नहीं है  तीतर बोला में इस घर में कई सालों से रह रहा हूं इसलिए यह घर मेरा ही है तुम अपने लिए कोई ओर घर देख लो जल्दी ही उनके बीच जोर जोर से बाद विवाद होने लगा उनमें झगड़ा होते देखकर आसपास रहने वाले जानवर वहां इकट्ठे हो गए जब उन्होंने तीतर और खरगोश से झगड़ने का कारण पूछा तो उन्होंने उनको सारी ...

नीला सियार

 बहुत समय पहले एक घने जगल में एक सियार रहता था एक दिन वह भोजन की तलाश में भटकता हुआ पास के एक गांव में जा पहुंचा वहां वह आवारा कुतो की नजर में आ गया और उन्होंने उसे भगा दिया जान बचाने के लिए सियार एक घर में घुस गया वह घर एक रंगरेज के था घर के आंगन में नीले रंग के पानी से भरा एक ड्रम रखा हुआ था जल्दबाजी में सियार वह ड्रम देख नहीं पाया और उसमें गुर पड़ा काफी देर तक सियार ड्रम में ही घुसा रहा आवारा कुतो के वहां से चले जाने के बाद वह ड्रम से बाहर निकला इतनी देर तक रंग में घुसे रहने के कारण उसका रंग नीला हो गया था सियार भागता हुआ फिर जगल में जा पहुंचा जब जगल के अन्य जानवरो ने उसे देखा तो वे घबराकर इधर उधर भागने लगे उन्होंने पहले कभी किसी नीले सियार को नहीं देखा था उधर सियार को यह पता नहीं था कि उसका रंग बदल गया है खुद से जानवरों को डरते देखकर उसे बड़ी हैरानी हुई वह भागता हुआ नदी पर गया वहां उसने स्वच्छ पानी में अपने प्रतिबिंब को देखा अपना रंग नीला हुआ देखकर उसे बड़ी हैरानी हुई वह यह भी समझ गया कि जानवर उसे देखकर डर क्यों रहे थे सियार चालाक तो था ही वह फिर से जगल में जा पहुंचा और जानवरों...

चींटी और टिड्डा

 गर्मी का मौसम था तेज धूप के कारण भयंकर गर्मी पड़ रही थी सभी पशु पक्षी गर्मी के कारण बेचैन थे दोपहर के समय सभी अपने अपने घरों में आराम कर रहे थे लेकिन ऐसे समय में भी चींटियां आराम नहीं कर रही थी वे खाने की सामग्री अपने घर में इक्कठा करने में लगी थी शायद ये भविष्य के लिए संग्रह कर रही थी वहीं पर एक टिड्डा भी आराम से लेटा हुआ था और गाना गा रहा था वह कुछ भी काम नहीं करता था सारे दिन इधर उधर घूमता रहता था जब उसने चींटियों को देखा तो हंसने लगा हंसते हुए वह चींटियों से बोला अरे लालची चींटियों क्यों इस गर्मी में मर रही हो थोड़ा सा आराम कर लिया करो तुम सब कितनी लालची हो मुझे देखो में खा पीकर मस्त हु जिंदगी के मजे ले रहा हूं चींटियां चुप रही लेकिन उनमें से एक चींटी बोली टिड्डे भाई हम लोग बरसात के दिनों के लिए खाने का सामान इकठ्ठा कर रहे हैं तुम्हे भी भविष्य के लिए कुछ इकठ्ठा कर लेना चाहिए टिड्डा जोर से हंसा और बोला कल जब होगी तब देखा जाएगा अभी से क्यों मरु उसे चींटियों की बात समझ में नहीं आई वह तो हंसता रहा और फिर गीत गाने लगा  गर्मी के बाद बरसात का मौसम भी आ गया आसमान में काले काले बा...

बुद्धिमानी व्यापारी

 बहुत पहले की बात है किसी गांव में एक व्यापारी रहता था उसका नाम धनीराम था वह बहुत परिश्रमी और दयालु था उसके पास एक गधा था प्रतिदिन सुबह वह गधे की पीठ पर नमक लादकर आस पास के गांवों में बेचने जाता था रास्ते में उसे कई नाले और छोटी छोटी नदिया पार करनी पड़ती थी  एक दिन व्यापारी एक नदी पार कर रहा था तभी अचानक गधा नदी में गिर गया नदी में गिरने से गधे की पीठ पर लदा हुआ नमक भी गल गया और गधे का वजन भी कम हो गया  जब गधा खड़ा हुआ तो उसे अपनी पीठ पर पहले की अपेक्षा वजन कम लगा इससे गधा बहुत खुश हुआ व्यापारी गधे को लेकर अपने घर वापस आ गया घर आकर व्यापारी ने गधे को उसके स्थान पर बांध दिया उस दिन गधे को पूरा आराम मिला इससे गधा बहुत खुश हुआ अब यह बात उसकी समझ में आ गई कि यह बोझ पानी में गिरने के कारण ही हल्का हुआ है रोजाना की तरह दूसरे दिन भी व्यापारी ने गधे पर नमक की बोरियो लादी और अपने व्यापार के लिए चल दिया गधा जैसे ही नदी पार करने लगा वह जान बूझकर पानी में बैठ गया व्यापारी ने गधे की और देखा उसे बहुत गुस्सा आया उसने उसकी खूब धुनाई की वह उसकी चालाकी समझ गया था वह गधे को लेकर वापस आ गया ...

कौआ की योजना

एक कौआ एक अशोक के पेड़ पर अपनी पत्नी के साथ घोंसला बनाकर रहता था एक दिन कोए की पत्नी ने अंडे दिए कौआ और उसकी पत्नी दोनों ही बहुत खुश थे लेकिन उनकी यह ज्यादा दिनों तक नहीं रही  उन्हें पता नहीं था कि उसी पेड़ के नीचे एक सांप भी बिल बनाकर रहने लगा है कौआ दंपत्ति को रोज भोजन की व्यवस्था करने बाहर जाना पड़ता था एक दिन जब वे भोजन के लिए गए। हुए थे तभी सांप मौका पाकर पेड़ पर चढ़ गया और तीनों  अंडे खा गया जब कौआ दंपति वापस लौटे तो तीनों अंडों को गायब पाकर बहुत दुखी हुए कोए की पत्नी का तो बुरा हाल हो गया बड़ी मुश्किल से कोए ने उसे चुप कराया  कुछ दिनों बाद कोए की पत्नी ने फिर अंडे दिए इस बार भी कोए और उनकी पत्नी ने बहुत उम्मीद बांध ली थी लेकिन उनके भाग्य में अभी बच्चो का सुख नहीं लिखा था इस बार कौआ दंपत्ति के सामने ही दुष्ट सांप ने उनके बच्चों को खा लिया और वे कुछ नहीं कर पाए सांप बहुत खतरनाक था और कोए चाहकर भी उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकते थे जब कोए सांप से नहीं निपट सके तो वे मदद मांगने के लिए अपनी पारिवारिक मित्र लोमड़ी के पास पहुंचे उन्होंने उसे अपनी सारी बात बताई और उसे मदद मांगी ...

चतुर बेटी

 किसी गांव में एक किसान रहता था वह बहुत गरीब था उसका घर टूटा फूटा था वह बहुत सीधा सादा ओर ईश्वर का सच्चा भक्त था उसकी एक बेटी थी वह बहुत सुंदर और सुशील तथा चतुर थी अपनी गरीबी के कारण किसान उसे स्कूल भेज पाया लेकिन लड़की इतनी होशियार निकली कि अपने आप पढ़ने लिखने सिख लिया वह अपनी सहेलियों से किताबें ले लेती थीं और उनकी सहायता से उन्हें पढ़ती थी वह हर बात को बड़े ध्यान से सुनती थीं धीरे धीरे वह पढ़ने लिखने में कुशल हो गई यह देख कर उसकी सहेलियों को भी हैरान होने लगा उसने किताबों से बहुत सी अच्छी अच्छी बातें सीखी जैसे दूसरों से कैसे बोलना चाहिए दूसरों का मन कैसे जितना चाहिए और कब कितना बोलना चाहिए उसके साथ रहकर उसका पिता भी व्यवहार की बहुत सी बातें सीख गया था  एक दिन वह किसान राजा के दरबार में उपहार लेकर गया उसने राजा से बड़ी अच्छी तरह ओर बेझिझक बातचीत की राजा को किसान का ढंग बहुत अच्छा लगा उसे इस बात पर आश्चर्य हुआ उसने किसान से कहा में सोचता हूं कि तुम पाठशाल कभी नहीं गए होगे फिर तुम्हे इतनी सुंदर बाते ओर ऐसा व्यवहार किसने सिखाया   किसान ने कहा अन्नदाता ये बाते मैने अपन...

कपटी चोर

 प्राचीन काल के समय एक गांव में चार चोर रहते थे वे आपस में घनिष्ठ मित्र थे चोरी करना उनका मुख्य काम था वे दिनभर तो इधर उधर माल को देखते रहते थे और रात को जाकर उस माल को चुरा लेते थे उनमें आपस में इतनी ईमानदारी थी कि वे चोरी के माल को बराबर बराबर बांट लेते थे उनमें कभी झगड़ा भी नहीं होता था कुछ समय बाद उन लोगों में कुछ चालाकी आ गई अब हरेक चोर यही सोचता रहता कि किसी दिन मोटा माल हाथ लगे और बाकी साथियों को मारकर सारा माल स्वयं हड़प लेगे लेकिन कभी ऐसा मौका हाथ नहीं लगा कुछ दिनों बाद उन चारों चोरों ने एक सेठ के घर में सेंध लगाई वहां पर उन्हें ढेर सारा जेवर रुपया आदि मिले उन्होंने उस धन को एक थैले में भर लिया और लेकर चल दिए दो दिन तक भूखे प्यासे जगल में ही छिपे रहे वे जानते थे कि सेठ के घर में चोरी की खबर सुनते ही पुलिस शहर के चप्पे चप्पे में फैल गई होगी इसलिए उन्होंने जगल में छिपे रहना उचित समझा कई दिन तक भूखे प्यासे रहते हुए उनके सब्र का बांध टूट गया उन्होंने फैसला किया कि उनके दो साथी बाजार जाए और वहां खाने पीने का सामान खरीदकर ले आए साथ ही साथ शहर का माहौल भी देख आए ऐसा निश्चय कर उनम...

चतुर कबूतर

 बहुत समय पहले एक बहेलिया था जो पक्षी पकड़ने में बहुत कुशल था हर महीने वह जगल में पक्षी पकड़ने जाता था और उन्हें बाजार में बेचकर अपनी जीविका चलाता था एक दिन उसने जगल के ऊपर कबूतरों को उड़ते हुए देखा कितने सुंदर कबूतर हैं उसने सोचा अगली बार मैं इन्हीं को पकडूंगा इन्हें बेचने पर मुझे निश्चय ही अच्छे पैसे मिलेगे अगले महीना बहेलिया उन कबूतरों को पकड़ने के लिए पूरी तरह तैयार होकर जगल में गया इस बार वह अपने साथ ढेर सारा दाना और एक बड़ी जाल लेकर आया था उसने दानों को खुली भूमि पर डालकर जाल बिछाया और पास ही छिपकर कबूतरों के आने का इंतजार करने लगा  जल्दी ही कबूतरों का झुंड वहां आ पहुंचा कबूतर उस समय बहुत भूखे थे और भोजन की तलाश में घूम रहे थे तभी एक युवा कबूतर की नजर भूमि पर बिखरे दानों पर पड़ी वह खुशी से चिल्लाया अरे अरे इधर देखो कितने सारे दाने भूमि पर बिखरे हुए पड़े हे आज तो यहां हमारे भोजन का पूरा प्रबंध हे उस कबूतर की बात सुनकर सारे कबूतर उसी और देखने लगे उन दानों पर नजर पड़ते ही वे भी बहुत खुश हुए उनके मुंह में पानी आ गया क्योंकि वे उन दानों को खाने के लिए खुश हो रहे थे उन कबूतरों...

तीन मछलियां

बहुत समय पहले एक नदी में तीन मछलियां रहती थीं उन मछलियों में बहुत अच्छी दोस्ती थी लेकिन जिंदगी को लेकर उन सबका नजरिया अलग-अलग था पहली मछली कोई समस्या सामने आने पर उससे निपटने में भरोसा करती थी दूसरी मछली का मानना था कि हमेशा बुद्धिमानी का परिचय देना चाहिए और मुसीबत सिर पर आने का इंतजार करने की बजाय समय रहते उससे निपटने का उपाय कर लेना चाहिए तीसरी मछली का मानना था कि प्रयास करने से कुछ नहीं होता वही होता हे जो भाग्य में लिखा होता है  एक दिन तीनों मछलियां नदी में तेर रही थी तभी उन्होंने नदी के तट पर बैठे दो मछुआरों को आपस में बात करते हुए देखा उनकी बाते सुनने के लिए वे तीनो तैरती हुई तट के समीप पहुंच गई  एक मछुआरे ने कहा इस नदी में मछलियों की कमी नहीं हे अगर हम इन मछलियों को पकड़कर बाजार में बेचे तो अच्छा मुनाफा कमा सकते हे छोटे तालाब में अब ज्यादा मछलियां नहीं रह गई हैं मुझे तो बड़ी हैरत हे कि इस नदी की मछलियों पर अब तक हमारा ध्यान क्यों नहीं गया?  चलो कोई बात नहीं यह आवाज दूसरे मछुआरे की थी हम कल से ही यहां पर मछलियां पकड़ना शुरू कर देगे अब हमारे पास किसी भी प्रकार की कोई...

सच्ची मित्रता

 बहुत समय पहले एक जगल में हाथियों का समूह रहता था उस समूह का सरदार सुमाली बहुत ही दयालु स्वभाव का था एक बार उस जगल में अकाल पड़ गया अकाल की वजह से जानवरों की हा लत खराब हो गई हाथी भी सब और पानी की तलाश करते घूमने लगे एक दिन एक हाथी भागता हुआ सुमाली के पास आया और बोला सरदार जंगल के बाहर जो नगर है न उसके दूसरी ओर की झील में पानी उपलब्ध है यह खबर सुनकर सुमाली बहुत खुश हुआ उसने तुरंत अपने झुंड को उसी ओर चलने का हुक्म दिया प्यासे हाथी अपनी पूरी रफ्तार से उसी और बढ़ने लगे तभी एक हाथी बोला हमें वहां पहुंचने के लिए उस नगर को भी पार करना पड़ेगा  उसमें कोई दिक्कत नहीं सूचना लाने वाले हाथी ने कहा उस शहर के निवासी बहुत पहले ही वह नगर छोड़कर जा चुके हैं यह है तो अच्छी बात हुई सुमाली बोला अगर उस नगर में लोग रह रहे होते तो हमें चक्कर लगाकर जाना पड़ता इसमें समय भी ज्यादा लगता और मेहनत भी खर्च होती लेकिन हाथियों को यह पता नहीं था कि मनुष्यो द्वारा वह नगर खाली करने के बाद चूहों ने उसे अपना घर बना लिया है उसे नगर में हजारों चूहे रहते थे जब हाथी मतवाली चाल से चलते हुए उस नगर से गुजरे तो हजारों चू...

विश्वास का मूल्य

 एक गांव में एक किसान अपने परिवार के साथ रहता था एक दिन वह एक शिशु नेवले को घर ले आया वह नेवला काफी घायल था और उसके घावों से खून बह रहा था किसान उस नेवले की मरहम पट्टी करने लगा तभी उसकी पत्नी वहां आ पहुंची और पूछने लगी यह नेवला कहा से लेकर आए  यह सड़क के किनारे घायल अवस्था में पड़ा हुआ था अब हम इसे अपने साथ ही रखेंगे किसान के हाल में ही एक बेटा पैदा हुआ वह ओर उसकी पत्नी पुत्र के साथ उस नेवले का भी पालन पोषण करने लगे जल्दी ही वह नेवला बड़ा हो गया किसान की पत्नी को हमेशा डर बना रहता था कि कही वह नेवला उसके बेटे को किसी तरह का नुकसान न पहुंचा दे  जब कभी वह अपने मन की बात अपने पति को बताती तो वह हंसता हुआ कहता यह सब तुम्हारा भ्रम हे नेवला बहुत वफादार होता है वह हमारे बेटे को अपने भाई के समान समझता हे नुकसान की तो दूर की बात हे वह तो इस किसी भी प्राणी को भी अपने रहते हुए हमारे बेटे पर हमला ने करने देगा  एक दिन किसान की पत्नी उसे खेत पर खाना देने गई जब वह घर लौटी तो उसने नेवले को घर के दरवाज़े पर ही देखा उसके मुंह से खून बह रहा था उसे देखते ही नेवला उसे अपना मुंह दिखाते हु...

दया का फल

 बहुत समय पहले एक जगल में एक शेर रहता था उस जगल में उसका शासन था शेर की आँखें बहुत बड़ी ओर लाल लाल होने के कारण उस जगल में सारे जानवर थर थर कांपते थे एक दिन दोपहर को एक चीतले का शिकार करके भरपेट भोजन किया और फिर लेटकर आराम करने लगा जल्दी ही गहरी नींद में सो गया औरजोर जोर से खराटे भरने लगा जिस जगह शेर सो रहा था वहीं पर एक चूहे का बिल था शेर के जोरदार खराटे से चूहा परेशान हो गया और अपने बिल से बाहर आया पहले तो चूहा शेर को देखकर घबराया लेकिन फिर वे सोचने लगा कि वह अभी गहरी नींद में सो रहा हे इसलिए यह मेरा अभी कुछ नहीं बिगाड़ सकता यह सोचकर सोते हुए शेर के ऊपर उछलने लगा उसकी उछल कुद से शेर को गुदगुदी होने लगी उसने अपनी पीठ पर पूंछ मारकर चूहे को भगा दिया ओर फिर गहरी नींद में सो गया चूहा इस बार शेर के नाक के पास जा पहुंचा और उसकी मूंछों के साथ खिलवाड़ करने लगा इस बार शेर की आंख खुल गई चूहे को अपने पंजे में पकड़ लिया फिर वह जोर से दहाड़ता हुआ चूहे से बोला बदमाश चूहे मेरी दोपहर की नींद खराब करने की तेरी हिम्मत कैसे हुई अब में तुझे खा जाऊंगा जगल के राजा की नींद खराब करने की सजा तुझे जरूर मिल...