दोस्ती
एक कुएं में मुलदत नाम का मेढक अपने परिवार और रिश्तेदारों के साथ रहता था। वह अपने रिश्तेदारों से बहुत चिढ़ता था क्योंकि वे अक्सर बिना बात उसे चिढ़ाते रहते थे। एक दिन मुलदत ने उन्हें सबक सिखाने का फैसला कर लिया। उसने सोचा इस कुएं से बाहर निकल कर किसी मजबूत प्राणी को अपना दोस्त बनाता हूं। फिर उसकी मदद लेकर मैं इन सबको सबक सिखाऊंगा। यह सोचकर कुएं से बाहर निकल आया और उसकी मुडेर के पास ही बैठकर मेंढ़को के किसी शत्रु का इंतज़ार करने लगा। थोड़ी देर में ही उसे एक सांप उस ओर आता दिखाई दिया। उसे देखते ही मूलदत की खुश हुआ। वह जानता था कि वह भयानक सांप उसके सब रिश्तेदारों को खत्म कर सकता है। उसने सोचा मैं इस सांप को अपने पक्ष में कर लूंगा। मेरे रिश्तेदारों के खत्म होने के बाद फिर मुझे चिढ़ाने वाला कोई नहीं रह जाएगा। यह सोचकर मूलदत उस सांप के पास जा पहुंचा और अपना परिचय देते हुए बोला मेरा नाम मूलदत है मैं तुम्हारा दोस्त बनना चाहता हूं। क्या तुम मेरी दोस्ती कबूल करोगे एक मेढक के मुंह से दोस्ती का नाम सुनकर सांप सोच में पड़ गया। उसने कहा एक मेंढक सांप का दोस्त बनना चाहता है क्या तुम्हे...