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Showing posts from December, 2025

दोस्ती

 एक कुएं में मुलदत नाम का मेढक अपने परिवार और रिश्तेदारों के साथ रहता था। वह अपने रिश्तेदारों से बहुत चिढ़ता था क्योंकि वे अक्सर बिना बात उसे चिढ़ाते रहते थे। एक दिन मुलदत ने उन्हें सबक सिखाने का फैसला कर लिया। उसने सोचा इस कुएं से बाहर निकल कर किसी मजबूत प्राणी को अपना दोस्त बनाता हूं। फिर उसकी मदद लेकर मैं इन सबको सबक सिखाऊंगा। यह सोचकर कुएं से बाहर निकल आया और उसकी मुडेर के पास ही बैठकर मेंढ़को के किसी शत्रु का इंतज़ार करने लगा। थोड़ी देर में ही उसे एक सांप उस ओर आता दिखाई दिया। उसे देखते ही मूलदत की खुश हुआ। वह जानता था कि वह भयानक सांप उसके सब रिश्तेदारों को खत्म कर सकता है। उसने सोचा मैं इस सांप को अपने पक्ष में कर लूंगा। मेरे रिश्तेदारों के खत्म होने के बाद फिर मुझे चिढ़ाने वाला कोई नहीं रह जाएगा।   यह सोचकर मूलदत उस सांप के पास जा पहुंचा और अपना परिचय देते हुए बोला मेरा नाम मूलदत है मैं तुम्हारा दोस्त बनना चाहता हूं। क्या तुम मेरी दोस्ती कबूल करोगे एक मेढक के मुंह से दोस्ती का नाम सुनकर सांप सोच में पड़ गया। उसने कहा एक मेंढक सांप का दोस्त बनना चाहता है क्या तुम्हे...

होशियार केकड़ा

 बहुत समय पहले एक घने जंगल में एक सुंदर झील थी जिसमें बहुत सी मछलियां, केकड़े, मगरमच्छ और अन्य प्राणी रहते थे। झील के निकट ही एक चालाक बगुला रहता था। झील की मछलियां और केकड़े ही उसका भोजन थे लेकिन अब वह बूढ़ा हो गया था और उसमें शिकार करने का दम और हौसला नहीं बचा था। एक दिन उसने मछलियों ओर केकड़ों का शिकार करने की एक तरकीब सोच निकाली। अगले ही दिन उसने झील के तट पर पहुंचकर आंसू बहाने शुरू कर दिया उसे रोते देखकर झील में तैर रही मछलियों को हैरानी हुई कुछ मछलियों ने उसके पास आकर पूछा बगुला काका क्या हो गया तुम रो क्यों रहे हों किस बात ने तुम्हे इतना दुखी कर दिया है। इतनी सारी मछलियों को पास देखकर बगुले का दिल खुशी से उछल रहा था। लेकिन उसने चेहरा पर दिल के भावों को प्रकट नहीं होने दिया। वह बड़ी दुखी आवाज में बोला आज में बहुत दुखी हू आज के बाद मैं तुम्हे कभी न देख पाऊंगा। क्यों क्या हुआ एक मछली ने पूछा तुम ऐसा क्यों कर रहे हो। तुम जब चाहो हमसे मिलने यहां आ सकते हो। आज सुबह मेरी एक ज्योतिषी से मुलाकात हो गई। उसने मुझे बताया कि यह झील जल्दी ही सुख जाएगी और इसमें रहने वाले सभी प्राणी तड़प तड...

आसमान गिर रहा है

 एक समय की बात है एक घने जंगल में चिम्पू नाम का खरगोश रहता था वह जंगल का सबसे डरपोक जानवर था और जंगल के जानवर यह बात जानते भी थे। वह किसी भी तरह की आवाज सुनकर बुरी तरह कांपने लगता था। जानवरों ने कई बार चिम्पू से अपना डरपोक स्वभाव छोड़ने को कहा था। लेकिन चिम्पू डरपोक ही बना रहा था।  एक दिन भोजन करने के बाद चिम्पू आम के एक पेड़ की छाया में लेटा हुआ था। जल्दी ही वह गहरी नींद में सो गया। तभी पेड़ से एक पका हुआ आम टूटकर चिम्पू के सिर पर जा गिरा। सिर से टकराकर वह भूमि पर गिरा और एक ओर लुढ़क गया। उधर चिम्पू सिर पर आम गिरते ही हड़बड़ाकर उठ गया। वह यह नहीं देख पाया था कि उसके सिर पर गिरा क्या है वह बड़ी हैरानी से इधर उधर देखने लगा लेकिन कुछ भी समझ पाने में नाकाम रहा। तभी चिम्पू को ख्याल आया कि जरूर आसमान का ही कोई हिस्सा टूटकर उसके सिर पर आ गिरा है बिना सोच समझे वह जोर जोर से चिल्लाने लगा अरे भागो आसमान गिर रहा है अपनी जान बचाओ भागते भागते वह टीकू गिलहरी के पेड़ के पास से गुजरा चिम्पू की बात सुनकर टीकू गिलहरी भी डर गई। बिना सोच समझे उसने अपनी मूंगफलियां बांटी और वहां से भाग निकली। उसने...

कछुआ और हंस

 बहुत समय पहले एक घने जगल से होकर बहने वाली एक नदी में एक कछुआ रहता था नदी के पास ही रहने वाले दो हंसो से उसकी बड़ी अच्छी दोस्ती थी। वे नदी में साथ ही तैरते ओर भोजन करते। आपस में गपशप करते हुए कब दिन निकल जाते उन्हें पिता ही नहीं चलता था। कछुआ अक्सर हंसो से कहता कि काश वह भी उनकी तरह खुले आकाश में उड़ सकता। हंस कहते कि अगर कछुए की तरह उनकी पीठ पर भी मजबूत कवच होता तो उन्हें शिकारियों के तीरों का डर नहीं रहता।  एक बार उस जगल में अकाल पड़ गया। अकाल की वजह से जगल के पेड़ सूखने लगें और वहां खाने पीने की वस्तुओं की भारी कमी हो गई। अब तो जानवर बहुत परेशान हुए। हरे भरे स्थान की तलाश में वे दूसरी जगहों पर जाने लगे। नदी में पानी की मात्रा बहुत कम रह गई थी। इसलिए हंसो ने भी किसी दूसरी नदी पर जाने का निश्चय किया। जब वे कछुए को अपने निर्णय के बारे में बताने के लिए गए तो वह रोते हुए कहने लगा अगर तुम लोग मुझे यहां अकेले छोड़कर चले गए तो मैं जीवित कैसे रहूंगा अगर मैं अकाल से न भी मरा तो अकेलेपन से जरूर मर जाऊंगा। तुम्हे तो पता ही है तुम्हारे अलावा मेरा यहां कोई दोस्त भी नहीं है।  कछुए क...

बन गया शेर

 चार मित्र अपने गुरु के आश्रम में रहकर विद्या सीख रहे थे गुरु ने उन्हें बहुत से श्लोकों का पाठ करना सिखाया था उन्होंने उन्हें बहुत सी पूजाओं ओर यज्ञों को संपन्न कराने की विधि भी सिखाई थी विद्या पूरी करने के बाद उन्होंने अपने घर लौट जाने का निश्चय किया। जब वे अपने गुरु का आशीर्वाद प्राप्त करने उनके समीप पहुंचे तो उन्होंने कहा मुझे जो कुछ भी आता था वह मैने तुम्हे सिखा दिया है लेकिन एक बात का ध्यान रखना। इस विद्या का प्रयोग खूब सोच समझकर करना अन्यथा तुम परेशानी में पड़ जाओगे इसके बाद शिष्यों ने गुरु को प्रणाम किया और अपने घरों की ओर चल पड़े। उनके गांव के रास्ते में एक घना जगल पड़ता था जब वे जगल से होकर गुजर रहे थे तभी उनकी दृष्टि एक शेर के कंकाल पर पड़ी। उसकी हड्डियों इधर उधर बिखरी पड़ी थी यह देखकर ज्ञानेंद्र नाम का एक शिष्य अपने साथियों से बोला साथियों अपनी परीक्षा लेने का यह हमे उपयुक्त अवसर मिला है मैं अपनी विद्या का प्रयोग करके इन हड्डियों को जोड़ देता हूं। कोई कुछ कह पाता इसके पहले ही ज्ञानेंद्र आंखे बंद करके एक मंत्र का पाठ करने लगा वह मंत्र पूरा होते होते यंत्र तंत्र बिखरी हड्ड...